लघु सिंचाई विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

निर्णय की प्रक्रिया व पर्यवेक्षण तथा उत्तरदायित्व निर्धारण

लघु सिंचाई विभाग का मुख्य उद्देश्य कृषकों को सुनिश्चित सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराते हुए कृषि उत्पादन में वृद्वि करना है। विभाग द्वारा प्रति वर्ष सिंचन क्षमता का अतिरिक्त सृजन किया जाता है। इस कार्य के लिए विभाग के विकासखण्ड स्तर पर 01 अवर अभियन्ता, लघु सिंचाई 2-3 बोरिंग टैक्नीशियन/सहायक बोरिंग टैक्नीशियन पदस्थ है जिसके द्वारा विकासखण्ड स्तर पर शासन की नीतियों के अनुरूप लघु सिंचाई कार्यो का निर्माण कराया जाता है। अवर अभियन्ता खण्ड विकास अधिकारी के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत रहता है तथा विकासखण्ड स्तर पर लघु सिंचाई कार्यो का संचालन के लिए जिम्मेदार है।

जनपद स्तर पर सहायक अभियन्ता पदस्थ है जिनका कार्यालय सामान्यतः मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय (विकास भवन) में स्थित है तथा मुख्य विकास अधिकारी के सहयोग से जनपद स्तर पर लघु सिंचाई कार्यो का सम्पादन कराते है।

सामान्यतः 2-3 जनपदों पर 01 अधिशासी अभियन्ता पदस्थ है जोकि आहरण वितरण अधिकारी होने के साथ-साथ लघु सिंचाई कार्यो के निर्माण के लिए जिम्मेदार है, जिसके लिए इन्हें आवश्यक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार प्रदत्त है।

2-3 राजस्व मण्डल पर 01 अधीक्षण अभियन्ता पदस्थ है जोकि मुख्य रूप से लघु सिंचाई कार्यक्रम का पर्यवेक्षण करते हैं तथा अपने कार्य क्षेत्र में दरों की अनुसूची, कार्यो की डिजाइन अनुमोदित करना तथा बड़े निर्माण कार्यो की तकनीकी स्वीकृति देने के लिए सक्षम हैं।

प्रदेश स्तर पर मुख्य अभियन्ता, प्रशासनिक व्यवस्था के साथ लघु सिंचाई कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु पदस्थ है तथा उनके द्वारा आपूर्ति खण्ड के माध्यम से आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी की जाती है।

लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण देने हेतु बक्षी का तालाब में निदेशक, प्रशिक्षण की देख-रेख में लघु सिंचाई विभाग का प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित हैं।

लघु सिंचाई कार्यक्रम का शासन स्तर पर कार्यान्वयन प्रमुख सचिव/सचिव, लघु सिंचाई की देख-रेख में होता है जोकि कृषि उत्पादन आयुक्त की सर्वोच्च देख-रेख में लघु सिंचाई कार्यो के सम्बन्ध में नीति विशयक तथा राजपत्रित अधिकारियों के सम्बन्ध में प्रषासनिक निर्णय लेते हैं।