लघु सिंचाई विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

विभाग का कार्य व कर्तव्य

उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जिसकी उन्नति एवं खुशहाली मुख्यतः कृषि पर आधारित है। कृषि उत्पादन में वृद्धि के निमित्त कृषको को स्वनियंत्रित, सामयिक व मितव्ययी निजी लघु सिंचाई साधनों को तीव्र गति से उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से लघु सिंचाई विभाग की स्थापना शासनादेश सं0 5819/38- 8-517/1964 दिनांक 08.10.1964 द्वारा की गयी थी,उस समय विभागाध्यक्ष का पद अधीक्षण अभियन्ता स्तर का था। शासनादेश सं0 6241/38-4-1402(1)/76 दिनांक 29.09.1976 द्वारा इसे उच्चीकृत कर मुख्य अभियन्ता के स्तर का किया गया।

वर्तमान में लघु सिंचाई विभाग प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार कम लागत के सिंचाई संसाधनों के विकास में सक्षम है। उदाहरण के तौर पर मैदानी क्षेत्रों में उथली बोंरिग,मध्यम गहरे नलकूप तथा भारी मशीनों से गहरे नलकूप करने के साथ-साथ बुन्देलखण्ड के पठारी एवं कठिन क्षेत्रों में ब्लास्टिंग द्वारा कूप निर्माण, पथरीले क्षेत्र में कूपों के अन्दर मशीन ले जाकर इनवेल बोरिंग कार्य, डी.सी./डी.टी.एच. मशीनों से आंशिक पठारी क्षेत्रों की बोरिंग जैसे कठिन कार्यो को विगत दो दशकों से सफलतापूर्वक सम्पन्न कर रहा है। भूगर्भीय जल के दोहन के साथ-साथ विभाग वर्षा जल का संरक्षण कर सिंचाई कार्यो में उपयोग और भूजल रिचार्ज हेतु चेकडैम निर्माण एवं परम्परागत जलस्रोतों के जीर्णोद्वार जिसमें तालाब एवं बन्धियों के कार्य प्रमुख है, को भी सम्पादित कर रहा है।

बोरिंग टैक्नीशियन, अभियन्ताओं तथा कार्यालय कार्मियों को विभागीय आवश्यकता के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए लघु सिंचाई एवं जल प्रयोग प्रशिक्षण संस्थान, बक्षी का तालाब, लखनऊ पूर्णयता सक्षम है। वर्तमान में इस केन्द्र पर ‘‘रूफ टाफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग’’ का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

लघु सिंचाई कार्यो द्वारा वर्तमान में प्रदेश के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र का 77.90 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित किया जा रहा है।